[13 Apr 2012 | No Comment | ]
मैं सफीना हुसैन हूं! मैं टीम बालिका हूं!!

राजस्‍थान में पाली और सीहोर के सैकड़ों गांव आज इस मायने में बदले हुए हैं कि वहां अशिक्षा का अंधेरा छंट रहा है। बचपन में ब्‍याह दी गयी बच्चियां आज स्‍कूल जाने की जिद कर रही हैं और इस जिद के पीछे खड़ी है टीम बालिका। टीम बालिका के बारे में सफीना हुसैन ने आज से दस साल पहले सोचा और तस्‍वीर बदल दी। उन्‍होंने हाल ही में मुंबई में टेड के मंच पर अपनी बात रखी। हम उसका वीडियो और हिंदी अनुवाद  http://mohallalive.com से साभार यहां प्रस्‍तुत कर रहे …

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[13 Apr 2012 | No Comment | ]

राजस्‍थान में पाली और सीहोर के सैकड़ों गांव आज इस मायने में बदले हुए हैं कि वहां अशिक्षा का अंधेरा छंट रहा है। बचपन में ब्‍याह दी गयी बच्चियां आज स्‍कूल जाने की जिद कर रही हैं और इस जिद के पीछे खड़ी है टीम बालिका। टीम बालिका के बारे में सफीना हुसैन ने आज से दस साल पहले सोचा और तस्‍वीर बदल दी। उन्‍होंने हाल ही में मुंबई में टेड के मंच पर अपनी बात रखी। हम उसका वीडियो और हिंदी अनुवाद  http://mohallalive.com से साभार यहां प्रस्‍तुत कर रहे …

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[4 Mar 2010 | 30 Comments | ]

नासिरूद्दीन
जहन में एक बात हमेशा कौंधती है, क्‍या लड़की की जिंदगी का सारा सफर शादी पर ही खत्‍म होता है।  मैं अक्‍सर सोचता हूँ कि दसवीं, बारहवीं में जो लड़कियाँ हर इम्‍तेहान में लड़कों से बाजी मारती रहती हैं, कुछ दिनों बाद ऊँची तालीम, नौकरी और जिंदगी के दूसरे क्षेत्रों में क्‍यों नहीं दिखाई देतीं? कहाँ गायब हो जाती हैं?
लड़की पैदा हुई नहीं कि शादी की चिंता। उसके लिए एफडी की फिक्र। उसके नैन-नक्‍श, दांत की बुनावट, पढ़ाई-लिखाई, काम-काज की चिंता भी शादी के लिए ही? यही नहीं शादी को …

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[4 Oct 2009 | 8 Comments | ]

एक)
बेटी
पढ़े्गी तो
समझेगी दुनिया। 
बनेगी खुद मुख्‍तार
फिर खुद लिखेगी
अपनी तकदीर और
तय करेगी अपना सफर
……………………….
दो)
पढ़े्गी नहीं
तो
समझेगी कैसे
हुए क्‍यों हालात
बदतर?
पढ़ेगी नहीं तो
बदलेगी कैसे?
हक की खातिर
लड़ेगी कैसे?
लड़ेगी नहीं तो
जीतेगी कैसे?
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[17 Aug 2009 | 3 Comments | ]

लोगों के नजरिये में है बेटियों के न होने का ‘उत्सव’
जितना सुख खेत में खड़ी ईख के बिकने से होता है, वैसा ही सुख जनमते बेटी के मरने से और अगर शादी से पहले बेटी मर गयी तो क्या कहने? यह अपनी तन से पैदा हुई ‘तनया’ के बारे में बुंदेलखंड के एक हिस्‍से के लोगों की राय है। बेटा है तो जीवन तरेगा … और अगर बेटियाँ हो गईं तो माँ का बुरा हाल। उनका होना कितना दु:ख का सबब है और चले जाना सुख का। इसे बुंदेलों की …

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[4 Jun 2009 | 12 Comments | ]

नासिरूददीन हैदर खाँ
यह चूरन दूर देश तक मशहूर है। मशहूर हो भी क्यों न? पुत्र लिंग पैदा करने का जो दावा है। कोई विज्ञापन नहीं। कोई तामझाम और लुभाने वाली पैकिंग नहीं। बस पुड़िया में बाँध कर मिलेगी। एक चुटकी का कमाल! बुंदेलखंड ही क्यों हमारे समाज में पुत्र चाह कितनी मजबूत है, यह इन चीजों से भी पता चलता है।
बांदा शहर से कोई 15 किलोमीटर दूर सेमरा क्षेत्र में ऐसा ही चूरन मिलता है। सिर्फ इस चूरन की वजह से यह गाँव दूर-दूर तक जाना जाता है। …

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[2 Jun 2009 | 2 Comments | ]

भ्रूण का लिंग परीक्षण करने वाले अल्ट्रासाउंड सेंटरों की चाँदी
किसी काम की नहीं पीपीएनडीटी सलाहकार समिति
नासिरूद्दीन हैदर खाँ
बेटा बताया बेटी हो गई… लायक नहीं हैं फिर भी अल्ट्रासाउंड मशीन चला रहे हैं … सरकारी डॉक्टर हैं पर लिंग जाँच कर कानून की खूब धज्जियाँ उड़ा रहे हैं… और करें भी क्यों न? न हींग लगे न फिटकरी ऊपर से रंग भी चोखा! इसमें तो मुनाफा ही मुनाफा है। और जिन पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी है, वह सब जानकर भी असहाय बने हैं। बांदा और चित्रकूट समेत सब जगह …

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[25 May 2009 | 7 Comments | ]

बुंदेलखंड की धरती पर धड़ल्ले से हो रही भ्रूण की लिंग जाँच
नासिरूद्दीन हैदर खाँ
बांदा/चित्रकूट। खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी- बुंदेलों के मुँह से स्त्री वीरता की हमने यही कहानी सुनी थी। लेकिन अब बुंदेलखंड में यह धुन ज्यादा सुनाई दे रही है-‘‘लड़की मरै घड़ी भर का दु:ख, लड़की जिये तो जनम भर का दु:ख।’’ लड़की यानी बेटियों के बारे में इस माटी के लोगों का यही नजरिया है। लखनऊ से 216 किलोमीटर दूर। पठार, जंगल और मौसम समेत हर चीज की ‘अति’ वाले इलाके में बिटिया …