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    तालिबान के खिलाफ़ गुल मकई उर्फ मलाला युसूफ़ज़ई

    नासिरूद्दीन 12-13 साल की ही एन फ्रैंक थी। दूसरे महायुद्ध के दौरान फासीवादी हिटलर की सेना से छिपने-छिपाने के दौरान वह एक डायरी लिख रही थी। आखिर में यह बच्ची पकड़ी गई। हिटलर के यातना शिविर में 15 साल की उम्र में उसने दम तोड़ दिया। सालों बाद इस डायरी के जरिए दुनिया ने एक बच्ची की नजर से हिटलर की दुनिया को देखा। यह ‘डायरी ऑफ ए यंग गर्ल’ के नामसे मशहूर है।

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