कुछ मर्दों के साथ भी हिंसा होती है लेकिन …
इंटरव्यू, घरेलू हिंसा Domestic Violence, जेण्डर जिहाद Gender Jihad, नासिरूद्दीन Nasiruddin, हिंसा के खिलाफ मर्द Add commentsइसकी तुलना महिला के खिलाफ होने
वाली हिंसा से कतई नहीं की जा सकती
नासिरूद्दीन
ढाका। हिंसा वही करता है जिसके पास सत्ता की ताकत होती है। कई बार यह ताकत कुछ औरतों के पास भी होती है। फिर वे भी पितृसत्तात्मक मूल्यों का इस्तेमाल करती हैं। लेकिन महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा का दायरा काफी बड़ा है। इसकी तुलना पुरुषों के साथ होने वाली हिंसा से कतई नहीं की जा सकती।
क्या घरों में सिर्फ औरतें ही हिंसा की शिकार होती हैं, मर्द नहीं? ढाका में जेण्डर समानता और महिला हिंसा के खिलाफ दक्षिण एशियाई देशों के संवाद में जब ‘हिन्दुस्तान’ ने इंटरनेशनल सेंटर फॉर रिसर्च ऑन वीमेन के गैरी बार्कर के सामने जब यह सवाल पेश किया तो वे थोड़ा रुके। होंठ भींचा और एक-एक शब्द तौलते हुए बोलना शुरू किया। ‘कुछ पुरुष मानसिक हिंसा के शिकार होते हैं। दक्षिण एशिया में घर के अंदर कुछ महिलाओं के पास सीमित सत्ता शक्ति होती है। वे इसका इस्तेमाल कई बार मर्दों, बच्चों और ससुरालियों के साथ हिंसा के रूप में करती हैं। यही नहीं महिलाओं का सामाजीकरण ऐसा होता है कि वे भावनाओं को ज्यादा खुले तौर पर जहिर कर पाती हैं। कई बार यही पुरुषों के साथ मानसिक हिंसा की वजह होती है।’ लेकिन गैरी आगाह करते हैं, महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा की तुलना, पुरुषों के साथ होने वाली हिंसा से नहीं की जा सकती। महिलाओं के साथ हिंसा काफी व्यापक और और कई तरह का है। उसकी जटिलताएँ काफी है। इसलिए यह मुद्दा उठाते वक्त काफी एहतियात बरते जाने की जरूरत है।
हिंसा के खिलाफ मर्द-5
पिछले दिनों बांग्लादेश की राजधानी ढाका में जेण्डर समानता और हिंसा रोकने में मर्दों की भागीदारी पर दक्षिण एशियाई देशों का एक संवाद आयोजित किया गया था। यह संवाद संयुक्त राष्ट्र संगठन के विभिन्न एजेंसियों ने मिलकर किया। इसमें भारतीय दल में मुझे भी शामिल होने का मौका मिला। इस बातचीत के इर्द गिर्द मैंने ‘हिन्दुस्तान’ में एक सीरिज लिखी। अब उसे जेण्डर जिहाद पर पेश कर रहा हूँ।
नासिरूद्दीन
वहीं सेंटर फॉर हेल्थ एंड सोशल जस्टिस, दिल्ली के डॉ. अभिजीत दास का कहना है ‘हिंसा चाहे जो करे गलत है। लेकिन हमें देखने होगा कि यह हिंसा कहाँ से आ रही है। क्या यह सामाजिक संरचना और विभेद की उपज है या फिर उत्पीड़न की प्रतिक्रिया है? अगर यह सामाजिक संरचना की वजह से हो रहा है यानी सत्ता स्थापित करने के लिए तो जहिर यह गंभीर मसला है। … और आमतौर पर पुरुष संरचना की वजह स्त्री की हिंसा के शिकार नहीं होते। ’ कुछ ही ऐसी राय बीस सालों से हिमाचल में समुदाय के साथ काम करने वाले सुभाष मेंढापुरकर की है।
लेकिन गैरी, सुभाष और अभिजीत जब यह कहते हैं तो साथ-साथ वे इसके खतरे से भी आगाह करते हैं। सुभाष कहते हैं कि अगर एक हजर में 999 औरतें हिंसा की शिकार हैं तो मर्द केवल एक होंगे। यही नहीं कई बार हिंसक मर्द अपने करतूत को जयज ठहराने के लिए इस तर्क का इस्तेमाल करेंगे। इसलिए यह जरूरी है कि जब हम घर में मर्दों के साथ होने वाली हिंसा की बात करें तो काफी सतर्क रहें।
वहीं, मदुरैई में काम करने वाली संस्था एकता की विमला चंदशेखर कहती हैं कि पुरुषों के साथ हिंसा होती है लेकिन पुरुष की हिंसा और औरत की हिंसा को एक तराजू पर नहीं तौला ज सकता। औरत की जिंदगी ज्यादा हिंसा के साये में रहती है। खतरे भी ज्यादा उठाने पड़ते हैं। मर्द को हर पग उठाने से पहले सोचना नहीं पड़ता।
(हिन्दुस्तान से साभार)


July 18th, 2009 at 1:27 pm
मैं बिमला चन्द्रशेखर जी की बात से बिलकुल सहमत हूँ पुरुष को जो हिँसा सहन करनी पडती है वो अक्सर उस दुआरा किये गये अब्याय–उत्पीडन या अवहेलना् की वजह से ही होती है फिर 99 प्रतिशत के मुकाबले 1 प्रतिशत क्या मायने रखता है इस जानकारी के लिये आभार्
July 18th, 2009 at 5:29 pm
पुरुषों के साथ होने वाली हिंसा के उदाहरण सामने आते हैं, लेकिन यह सही है कि वह महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा के मुकाबले नगण्य है।
July 18th, 2009 at 11:56 pm
सदियों से दबायी उत्पीड़ित जाति, अधिकार मिलने पर इसका दुरुपयोग भी करती है, लेकिन यह सही है कि पुरुषों के साथ होने वाली हिंसा महिलाओं के शोषण-उत्पीड़न के सामने कुछ भी नहीं।
July 27th, 2009 at 10:55 pm
हिंसा चाहे किसी के भी साथ हो वह गलत होती है लेकिन यहां सवाल महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा को व्यापक परिदृश्य में देखने की है। कुछ पुरूष वर्चस्ववादी लोग पुरूषों के साथ महिलाओं के द्वारा किए जाने वाले हिंसा का तर्क देते हैं जो कि तस्वीर का एक बहुत छोटा सा पहलू है और मुख्य मुद्दे से भटकाने की चाल है। मैं इस बात से पूरी तरह से सहमत हूं कि महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा के सामने पुरूषों के साथ होने वाली हिंसा अपवाद है और जो बहुत माएने नहीं रखती है।