बेटी
पढ़े्गी तो
समझेगी दुनिया।
बनेगी खुद मुख्तार
फिर खुद लिखेगी
अपनी तकदीर और
तय करेगी अपना सफर
……………………….
दो)
पढ़े्गी नहीं
तो
समझेगी कैसे
हुए क्यों हालात
बदतर?
पढ़ेगी नहीं तो
बदलेगी कैसे?
हक की खातिर
लड़ेगी कैसे?
लड़ेगी नहीं तो
जीतेगी कैसे?
बेटी
पढ़े्गी तो
समझेगी दुनिया।
बनेगी खुद मुख्तार
फिर खुद लिखेगी
अपनी तकदीर और
तय करेगी अपना सफर
……………………….
दो)
पढ़े्गी नहीं
तो
समझेगी कैसे
हुए क्यों हालात
बदतर?
पढ़ेगी नहीं तो
बदलेगी कैसे?
हक की खातिर
लड़ेगी कैसे?
लड़ेगी नहीं तो
जीतेगी कैसे?
October 4th, 2009 at 4:11 pm
लड़ेगी नहीं तो
जीतेगी कैसे?
जीतने के लिए लडना ही होगा. लडने के लिये तो पढना ही होगा.
बहुत सुन्दर रचना
October 4th, 2009 at 6:49 pm
बहुत सही बात कही आपने जब तक लड्की पढेगी नही तब तक कुछ नही होगा
October 4th, 2009 at 8:01 pm
बहुत उम्दा !!! कवि का नाम भी होना चाहिए यहाँ पर। जिनकी भी रचना है, उन्हें बधाई !!!
October 5th, 2009 at 12:46 pm
sahas snghars pragati tab hoga jab betian paregi
October 5th, 2009 at 11:03 pm
बहुत ही खूबसूरत रचना !!
October 6th, 2009 at 12:39 am
सुन्दर व सटीक कविताएँ।
घुघूती बासूती
October 6th, 2009 at 2:16 pm
bahut khoob nasir bhai, yadi kavita aapki hi hai to aur bhi nikhare ye rang.
October 7th, 2009 at 8:06 am
Nasiruddin Bhai,
Betion ko chahiye ke “LADO PADHAI KARNE KO-PADHO SAMAJ BADALNE KO. Badhiya poem hai.badhai!!!