‘सुंदर-सुशील-संस्कारी’ बहू!
कविता, घरेलू हिंसा Domestic Violence, जेण्डर जिहाद Gender Jihad Add commentsतीन)
अकड़ते हो
घमंड में चूर।
नहीं थकते शेखी बघारते
पर बड़े बेशर्म हो भई।
भैंस/स्कूटर/ कलर टीवी
या फिर चंद पैसे…
नहीं मिले तो
हिचकते नहीं
मारने से संगनी को!
चार)
भैंस चाहिए
स्कूटर और कलर टीवी भी
फ्रिज है तो माइक्रोवेव ओवन चाहिए
हाँ, अपना फ्लैट भी होना चाहिए
क्यों?
दुकान के लिए पगड़ी मिल जाती तो क्या कहने
और जिंदगी शुरू करने के लिए
थोड़ा सा कैश मिल जाता तो क्या खूब होता
नहीं?
…..
…..
अगर नहीं मिला?
तो नहीं चाहिए
‘सुंदर-सुशील-संस्कारी’ बहू!
तो नहीं रहेगी
‘सुंदर-सुशील-संस्कारी’ बहू!


October 6th, 2009 at 3:31 pm
भैस कलरफुल टी.वी. सुन्दर सुशील वधू चाहिए …. मजेदार पोस्ट. बहुत
October 7th, 2009 at 10:45 am
……
to nahi rahegi
’sundar-shusheel-sanskaari’ bahu.
wakai…
October 7th, 2009 at 10:25 pm
तो नहीं चाहिए
‘सुंदर-सुशील-संस्कारी’ बहू!
तो नहीं रहेगी
‘सुंदर-सुशील-संस्कारी’ बहू!
بہت خوب
October 8th, 2009 at 1:47 pm
to aap bhi kavi ho gaye. ab to buch ke rehna padega
October 12th, 2009 at 7:05 am
thanks it would help us