अनचाही मुसलमान बेटियाँ: जमीनी हकीकत
नासिरूद्दीन Nasiruddin, मुसलमान, मुस्लिम महिला Muslim Women, लिंग चयन Sex Selection Add commentsकई लोगों को लगता है कि इस तरह की टिप्पिणियाँ या रपट खामख्वाह के मुद्दे उछालने का काम करती हैं। फिर वो इसकी तहकीकात में ढेर सारे ऐसे सवाल करते हैं, जिनका वर्तमान रपट से कम ताल्लुक होता है। मुसलमानों में लिंग चयन और लिंग चयनित गर्भपात की क्या हालत है, उसको समझने के लिए ये चंद नमूने काफी हैं। अभी नहीं चेते तो काफी देर हो जएगी। आँख बंद कर लेने से हक़ीक़त बदल जाती तो क्या बात थी?
नासिरूद्दीन हैदर खाँ
कन्या भ्रूण का गर्भपात कराने वाले शौहर के खिलाफ मुकदमा
गर्भ की लिंग जँच, फिर कन्या भ्रूण का गर्भपात और इसके खिलाफ माँ की शिकायत- यूपी में यह अपनी तरह का पहला मामला है। हिम्मत का यह काम किया फर्रुखाबाद के अतियापुर गाँव की एक मुस्लिम महिला रजिया ने। रजिया ने अपने शौहर के खिलाफ कन्या भ्रूण का जबरदस्ती गर्भपात कराने का मुकदमा किया है। रजिया के तीन बच्चे हैं। चौथी बार जब वह गर्भवती हुई तो उसके शौहर ने अल्ट्रासाउंड के लिए दबाव डाला। एक स्थानीय नर्सिंग होम में उसका अल्ट्रासाउंड कराया गया। इसमें पता चला कि गर्भ में कन्या है। रजिया पर गर्भ को गिराने का दबाव पड़ने लगा। रजिया ने इनकार किया तो उसके ससुरालियों और शौहर ने जुल्म ढहाना शुरू कर दिया। उसने पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाही पर नाकाम रही। आखिरकार किसी तरह वह 27 मार्च 2008 को एसपी लक्ष्मी सिंह से मिलने में कामयाब हुई और अपनी तकलीफ बयान की। इसके बाद एसपी ने महिला की ख्वाहिश के खिलाफ गर्भपात कराने का मुकदमा लिखने का हुक्म दिया। (स्रोत: प्रेट्र, 28 मार्च 2008, फर्रुखाबाद)
यह वाकया एक बार फिर साबित करता है कि मुसलमानों में भी लिंग चयन और कन्या भ्रूण के गर्भपात धड़ल्ले से हो रहे हैं। यह सिर्फ बड़े शहरों तक नहीं है। यह बीमारी छोटे शहरों और गाँवों तक पहुँच चुकी है। ( आगे पढ़ने के लिए क्लिक करने की तकलीफ करें)
लिंग चयनित गर्भपात के बाद किसी तरह बची माँ
शमीम बाराबंकी के रूदौली के मूल बाशिंदा हैं। इस वक्त लखनऊ में रहते हैं। अच्छा कारोबार है। उनकी चार बेटियाँ हैं। इतनी संतान चाहते नहीं थे पर बेटे की चाहत में बेटियाँ होती गयीं। इस बीच उनकी बीवी ने दो बार गर्भपात भी करवाया। एक बार फिर उन्हें बेटे की चाहत हुई। पत्नी को गर्भ ठहरा तो कोई शक न रहे, इसलिए लिंग जँचवाने की जुगत की। लिंग जँचवाया और पता चला गर्भ में कन्या भ्रूण है। उनके लिए यह भ्रूण किसी काम का नहीं था। इसलिए लिंग चयनित गर्भपात करा दिया। लेकिन पत्नी को दूसरी दिक्कतें पैदा हो गईं। जान पर बन आई। किसी तरह पत्नी को बचाया ज सका।
बेटे की चाह में बाप ने दुधमुँही बेटी की जन ली
पश्चिम बंगाल का एक जिला है, मुर्शीदाबाद। इस जिले के एक गाँव में रोजीना खातून को मायके में तीसरी बेटी पैदा हुई। उसके शौहर मुश्ताक को यह नागवार गुजरा। उसे तो घर का ‘चिराग’ चाहिए था। मुश्ताक 15 दिन बाद ससुराल गया और प्यार करने के बहाने बेटी को गोद में ले लिया। मौका देख कर उसने बच्ची के दूध में जहर मिला दिया और वही दूध बच्ची को पिला दिया। बच्ची की मौत हो गई। रोजीना, मुश्ताक की दूसरी बीबी है। उसकी पहली बीबी रोशन को भी बेटी हुई थी। बाद में उसने खुदकुशी कर ली। खुदकुशी की वजह, मुश्ताक के बेटे की चाह ही थी।
लिंग जँच कराने वाले मुसलमानों की तादाद बढ़ी है
स्त्री/प्रसूति रोग विशेषज्ञ और वात्सल्य की मुख्य कार्यकारी डॉक्टर नीलम सिंह का कहना है, ‘‘सन् 1991-92 से अब तक काफी फर्क आया है। शुरू-शुरू में मेरे पास जो लोग लिंग जँच की माँग लेकर आते थे, उनमें 99 फीसदी हिन्दू हुआ करते थे। लेकिन मुझे जहाँ तक याद है, सन् 2000 के बाद मुसलमान भी लिंग जँच की माँग के लिए आने लगे। महीने में करीब पाँच छह लोग मेरे पास भूले-भटके आ जाते हैं। इनमें एक-दो मुसलमान होते हैं। यह तब है, जब मेरे बारे में लोगों को पता है कि मैं यह जाँच नहीं करती और मैं इसके खिलाफ मुहिम में शामिल हूँ। जरा कल्पना कीजिए, जो लोग ऐसा करते हैं, उनके पास कितने लोग जाते होंगे।’’
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May 24th, 2009 at 1:58 pm
कहीं कोई फ़र्क नही किसी भी धर्म मे ! यही इंसान मौका पडते ही मजहबी बन जता है और जब रिशतों की बात आती है तो उसका चेहरा पर चढी कालिख उजागर हो जाती है । हकीकत मे धर्म इंसान के लिये सिर्फ़ इस्तेमाल की वस्तु है , असली धार्मिक शिक्षाओं से उसे कोई लेना देना नही । समाज के एक वर्ग मे व्याप्त कुरीतियाँ दूसरे वर्ग द्वारा किस आसानी से स्वीकार कर ली जाती है , ऐसी मजहबी एकता की मिसाल भले कहाँ मिलेगी
June 2nd, 2009 at 5:57 pm
आज का ये लेख़ पढकर मैं अपनी माँ को लाख़ों सलाम करुंगी कि जिसने अनपढ होटल हुए भी हमारा तीनों बहनों को अच्ची तालीम दी। जिसकी बदौलत आज हमारा एक ऐसे मुकाम पर हैं कि तीनों बहनें सरकारी नौकरी में हैं। हम आज अपने समाज के रोयल फ़ेमिली से रिश्ते से ज़ुडे हुए हैं ये सब हमारी माँ की तालीम है।
हमारा तो चाहेंगे कि हमारा भी अपनी बेटीओं को यही तालीम दें जो हमारी माँ देकर गइ।
June 3rd, 2009 at 11:08 am
[...] अनचाही मुसलमान बेटियाँ: जमीनी हकीकत [...]
June 8th, 2009 at 8:13 am
नासिर भाई, देर रात’घुघूती बासुती ब्लाग’के रेफरेंस पर अभी सुबह सुबह आप तक पहुंचा,आपका ब्लाग,मकसद,और काम अच्छा लगा!पिछले कई सालों से ज़िहाद के नाम से ही भाई लोगों नें डरा रखा है!लेकिन आपके ज़िहाद के लिए दुआयें !